आलमगीर आलम झारखंड कांग्रेस के नये अध्यक्ष !

आलमगीर आलम झारखंड कांग्रेस के नये अध्यक्ष !

प्रदेश कांग्रेस में अंदरुनी गुटबाजी से नाराज डॉ अजय कुमार ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही नये अध्यक्ष को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है. जानकारी के मुताबिक विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता और पूर्व स्पीकर रहे आलमगीर आलम को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. यदि ऐसा होता है, तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत को विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी दी जा सकती है. हालांकि फिर से सुखदेव भगत को कमान सौंपने पर भी पार्टी के अंदर चर्चा चल रही है.

आलमगीर आलम पर विचार कर रही पार्टी

सुखदेव भगत, डॉ अजय से पहले प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. मगर उनकी भी कार्यशैली को लेकर उस समय प्रदीप बलमुचू जैसे बड़े नेता सवाल खड़ा किये थे. ऐसे में पार्टी को संदेह है कि यदि सुखदेव भगत को पीसीसी की कमान दी जाती है, तो विवाद खत्म होने की बजाय नये सिरे शुरू हो जायेगा. ऐसे में पार्टी सहज, सरल और सर्वमान्य नेता के रूप में आलमगीर आलम पर विचार कर रही है. डॉ अजय ने अपने इस्तीफा पत्र में भी उनका जिक्र किया है. पार्टी की नजर अल्पसंख्यक कोटे पर भी है, इस वजह से आलमगीर आलम के प्रदेश अध्यक्ष बनने की  संभावना प्रबल है. उनको दिल्ली से बुलावा भी आया है. रविवार को दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक होनी है, जिसके बाद झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर निर्णय हो जाएगा.

इस्तीफा पत्र में बड़े नेताओं पर हमला

इधर, पार्टी आलाकमान को लिखे तीन पन्नों के इस्तीफा पत्र में डॉ अजय कुमार ने प्रदेश कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी और निजी स्वार्थ की पोल खोल दी. डॉ अजय ने प्रदेश के बड़े नेता सुबोधकांत सहाय, प्रदीप बलमुचू, फुरकान अंसारी, ददई दुबे सहित कई नेताओं के निजी स्वार्थ और संबंधियों के चुनाव लड़ने के लिए सीटों की मांग का जिक्र किया है. उन्होंने आरोप लगाते हुए लिखा कि रांची के कांग्रेस भवन में किन्नरों से उत्पात मचाने के लिए सुबोधकांत सहाय ने प्रोत्साहित किया, जो बेहद ही घटिया हरकत थी.

हालांकि एक पक्ष ये भी है कि डॉ अजय के बड़बोलापन से पार्टी के बड़े नेता नाराज थे. विरोधी गुट डॉ अजय पर गैर राजनीतिज्ञ और बाहरी होने का आरोप लगा रहे थे. पुराने कांग्रेसियों की उपेक्षा और दूसरे दल के नेताओं को पार्टी में शामिल कराने पर तरजीह देने का भी आरोप उनपर लगाया गया. लोकसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में गड़बड़ी करने का भी आरोप डॉ अजय पर लगा. दरअसल विवाद की मुख्य वजह विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले गठबंधन को लेकर है. बड़े नेताओं को इस बात की चिंता सता रही है कि उनके और उनके संबंधियों के टिकट गठबंधन के कारण कट सकते हैं. यही वजह है कि प्रदेश के बड़े नेता डॉ अजय को हटाने पर तुले हुए थे.

सुखदेव भगत के बाद 20 नवंबर 2017 को डॉ अजय कुमार ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का कमान संभाला था. लेकिन 16 महीने के कार्यकाल में वह प्रदेश कांग्रेस कमिटी का गठन तक नहीं कर पाये.

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