बकाया 11 हजार करोड़ और हानियाँ कम करे तो दरों में बढ़ोत्तरी आवश्यकता नहीं

बकाया 11 हजार करोड़ और हानियाँ कम करे तो दरों में बढ़ोत्तरी आवश्यकता नहीं

लखनऊ। तीन दिन पहले प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में की गयी व्यापक बढ़ोत्तरी का विरोध जहाॅ पूरे प्रदेश में चल रहा है, वहीं उपभोक्ता परिषद आज वह खुलासा करने जा रहा है, जो सरकार को सोचने पर मजबूर कर देगा। बिजली दर बढ़ोत्तरी को लेकर पूरे प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। वर्तमान में जिस प्रकार से पावर कार्पोरेशन सरकार के माध्यम से बिजली दरों मंे व्यापक बढ़ोत्तरी कराया वह उचित नहीं है। वर्तमान में बिजली कम्पनियाँ यदि सरकारी विभागों पर अपना कुल बकाया लगभग रू0 11 हजार करोड़ वसूल लें, और एटीएण्डसी हानियाँ कम कर लें, तो बिजली दरों में बढ़ोत्तरी की कोई आवश्यकता नहीं पडतीघ् । देश के 25 राज्य जिन्होंने ‘उदय’ एग्रीमेन्ट किया, उनमें से कुछ राज्यों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश की हालत काफी खराब है जुलाई 2019 में लोकसभा में रखे गये आकड़े स्वता उदय की पोल खोले रहे ।ऐसे में एटीएण्डसी हानियों को कम करने पर जोर देना चाहिए। उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा ‘उदय’ अनुबन्ध करने वाले 25 राज्यों का जो औसत एटीएण्डसी हानियाँ लगभग 18.24 प्रतिशत हैं वहीं उत्तर प्रदेश की एटीएण्डसी हानियाँ 24.64 प्रतिशत औसत से कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में बिजली कम्पनियाँ अपने में सुधार लायें और अपनी अक्षमता का खामियाजा प्रदेश के उपभोक्ताओं पर न डालें।

‘उदय’ के अन्तर्गत एटीएण्डसी हानियों की कुछ महत्वपूर्ण राज्यवार स्थिति

क्र0सं0 राज्य वित्तीय वर्ष 2015-16 वित्तीय वर्ष 2019-2020
1- आन्ध्र प्रदेश 9.41 प्रतिशत 13.41 प्रतिशत
2- बिहार 43.74 प्रतिशत 27.39 प्रतिशत
3- छत्तीसगढ़ 21.79प्रतिशत 23.28प्रतिशत
4- गुजरात 15.04प्रतिशत 12.59प्रतिशत
5- हरियाणा 29.83प्रतिशत 17.45प्रतिशत
6- पंजाब 15.9प्रतिशत 12.04प्रतिशत
7- उत्तर प्रदेश 26.47प्रतिशत 24.64प्रतिशत
8- उत्तराखण्ड 17.19प्रतिशत 12.64प्रतिशत
9- राजस्थान 30.41प्रतिशत 21.29प्रतिशत
उदय 25 राज्यों का औसत 20.8 प्रतिशत 18.24 प्रतिशत

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