बेहरोड़ थाना अटैक : हेडकांस्टेबल की बर्खास्तगी या पुलिस का आपराधिकरण..?

बेहरोड़ थाना अटैक : हेडकांस्टेबल की बर्खास्तगी या पुलिस का आपराधिकरण..?

राजस्थान,(G.N.S)। अलवर जिले के बेहरोड थाने में बदमाशों के अंधाधुंध फायरिंग कर हवालात में बंद साथी विक्रम उर्फ पपला को छुड़ा कर ले जाने के मामले के तीन दिन बाद डीजीपी ने थाने के समस्त स्टाफ की बदली के साथ ही दो हेडकांस्टेबल रामअवतार और विजयपाल को पुलिस सेवा से ही बर्खास्त कर दिया है।

दो हेडकांस्टेबल की बर्खास्तगी इस बात को भी पुष्ट करती है कि इनकी पपला को भगाने में कहीं न कहीं कोई संदिग्ध भूमिका थी। पुलिस विभाग इस मामले की जांच कर रहा है कि उस दिन थाने में जो घटित हुआ, वह किन परिस्थितियों और किस प्लानिंग के साथ हुआ। प्रारंभिक जांच के बाद डीजीपी ने दो हेडकांस्टेबल को बर्खास्त करने के साथ ही पूर्व डीएसपी, थानाधिकारी, एक हेडकांस्टेबल और एक कांस्टेबल को निलंबित कर थाने के समस्त स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया है। इनकी जगह पर डीजीपी ने पूरे थाने में नया स्टाफ लगा दिया है।

पुलिस पर हुए अब तक के सबसे बड़े हमले में पुलिस की मिलीभगत.?

राजस्थान के कई जिलों में तस्करी, एक्सटॉर्शन गिरोह के बीच गैगवार और कुख्यात बदमाश काफी संख्या में रहे हैं। बदमाश कितना ही कुख्यात क्यों न हुआ हो, लेकिन कभी किसी ने थाने के अंदर घुसकर फायरिंग कर साथी को छुड़ा ले जाने की हिमाकत नहीं की थी। कुख्यात बदमाश पुलिस कस्टडी से भागे भी तो पेशियों पर लाते-ले जाने हुए भागे, थाने पर इस प्रकार हमला करके फरार होने की घटना कभी नहीं हुई। इसीलिए बेहरोड थाने में बदमाशों के अंधाधुंध फायरिंग कर साथी को छुड़ा ले जाने की घटना को राजस्थान में पुलिस पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। यह हमला उस विश्वास पर भी था, जो आमजनता को यह भरोसा दिलाता है कि थाना तुम्हारी सुरक्षा के लिए है। जब थाने सुरक्षित नहीं हैं, तो आमजनता कैसे सुरक्षित होगी..?

घटना के बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि बदमाशों को कहीं न कहीं थाने के अंदर से किसी के जरिए कोई सपोर्ट मिला है। वरना इतनी हिमाकत उनकी नहीं होती।

अब जब दो हेडकांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त किया है, तो इस संभावना पर मोहर लगती नजर आ रही है कि पुलिस पर हुए अब तक के सबसे बड़े हमले में पुलिस कर्मियों की ही मिलीभगत थी।

हालां कि पुलिस महानिदेशक ने दोनों हेडकांस्टेबल को बर्खास्त करने के आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान दोनों हेडकांस्टेबल की भूमिका कैसे संदिग्ध थी। उन्होंने ऐसा क्या किया था कि उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया। जनता अपने सवाल का जवाब मांग रही है, वह दोनों हेडकांस्टेबलों के उस कृत्य के बारे में जानना चाहती है, जिसने समाज में पुलिस के प्रति विश्वास को चोट पहुंचायी है।

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