ईको टूरिज्म के माध्यम से लोगों का प्रकृति से ज्यादा जुड़ाव होगा

ईको टूरिज्म के माध्यम से लोगों का प्रकृति से ज्यादा जुड़ाव होगा

वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री सुखराम विश्नोई ने कहा कि वर्तमान भौतिकवाद के युग में ईको टूरिज्म का विकास बहुत जरूरी है। इससे लोग प्रकृति सेे ज्यादा नजदीकी से जुड़ सकेंगे जो उन्हें मन की शांति के साथ निरोग रहने में मदद करेगा। श्री विश्नोई बुधवार को यहां राजस्थान फोरेस्ट्री एंड वाइल्डलाइफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरएफडब्ल्यूटीआई) में ‘‘सस्टेनेबल इको टूरिज्म ः चैलेंजेज एंड स्ट्रेटजिज ऑफ सक्सेसफुल इम्प्लीमेंटेशन’’ पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन कर संबोधित कर रहे थे। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री ने कहा कि लोग जितने प्रकृति से दूर जा रहे हैं, वह उतने ही ज्यादा बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। हमें वनों और वन्य जीवों के संरक्षण के साथ लोगों को प्रकृति से जोड़ना होगा। इसके लिए ईको टूरिज्म अच्छा माध्यम है जिसकी प्रदेश में विपुल संभावनाएं हैं। हमें इस प्रकार से ईको टूरिज्म का विकास करना होगा कि यहां के प्राकृतिक संसाधनों को कोई नुकसान नहीं हो और स्थानीय लोगों को फायदा मिले।  श्री विश्नोई ने कार्यशाला में भाग ले रहे अधिकारियों से आह्वान करते हुए कहा कि वह देश-प्रदेश के वनों एवं वन्य जीवों को बढ़ावा देने पर मंथन करें तथा सुझाएं कि इन बेजुबानों के लिए हम और क्या कर सकते हैं। कार्यशाला जो अनुभव यहां साझा करें उसका फायदा फील्ड तक पहुंचाएं तभी इसकी पूर्ण सार्थकता होगी और हम हमारे उद्देश्य में कामयाब होंगे।
पौधों एवं वन्य जीवों को बचाने के लिए रजिस्टर मैंटेन करने की शुरूआत
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री ने वन अधिकारियों को ईमानदारी एवं पूर्ण निष्ठा से कार्य करने की सीख देते हुए कहा कि फील्ड में पौधों एवं वन्य जीवों को बचाने के लिए वनपाल से लेकर उप वन संरक्षक तक जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। इसके लिए रजिस्टर मैंटेन करने की शुरूआत की जा रही है। वहां कार्यरत अधिकारी तबादला होने या सेवानिवृत्ति पर अपने अधिकार वाले वन क्षेत्र, पौधों एवं वन्य जीवों की स्थिति की प्रविष्टि करेगा और नवपदस्थापित अधिकारी को संभलाएगा। इससे वन क्षेत्र में नए अतिक्रमण को रोकने, पुराने पेड़ों को बचाने और नए पौधे विकसित करने में मदद मिलेगी।
नए ईको टूरिज्म स्पॉट विकसित कर टूरिस्ट मेप पर उभारना होगा
वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) श्री दीपक भटनागर ने कहा कि राज्य में टाइगर अभयारण्यों के अलावा ईको टूरिज्म विकास की बहुत संभावनाएं हैं। हमें नए ईको टूरिज्म स्पॉट को विकसित कर हाई लाइट करना होगा और प्रदेश के टूरिस्ट मेप पर उभारना होगा। इससे राज्य में ईको टूरिज्म का व्यापक विस्तार होगा और टाइगर अभयारण्यों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
प्रकृति संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों को फायदा मिलेगा
राजस्थान फोरेस्ट्री एंड वाइल्डलाइफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. एनसी जैन ने बताया कि ईको टूरिज्म में उत्तरदायित्वपूर्ण ट्रेवल के साथ प्रकृति का संरक्षण और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। इसका प्रबंधन इस प्रकार किया जाएगा कि प्राकृतिक संसाधन सतत बने रहें। कार्यशाला में इन्हीं बातों पर मंथन कर ईको टूरिज्म के विकास की संभावनाओं को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जाएगा। कार्यशाला केन्द्र एवं विभिन्न राज्यों के ईको टूरिज्म से जुड़े अधिकारी एवं वन विभाग के उच्च अधिकारी उपस्थित थे।
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